इस बार गल्ती मेरी नहीं है माँ‌!

इस बार गल्ती मेरी नहीं है माँ

मेंने नहीं कहा था इन परिन्दो से,
के ये पंख तुम्हारे मेने दिए हैं
फिर भी ये मेरे आस रहे।
मेंने नहीं सिखाया था उड़ना इनको
फिर भी ये मेरे पास रहे।

फ़िर क्यूँ ..? 
फिर क्यूँ... जो मुझे मोह हुआ तो चल दिए, बुझाकर ये जलती शामां
अंगारो बीच जलता रहा मैं अकेला, देखती राही मुझेको यें भीड़ जमां


इस बार गल्ती मेरी नहीं है माँ

-- 

मेंने तो सिर्फ अपना साथ दिया था
जब जिसने जिस तरह अपना माना, उसको अपना हाथ दिया था
नहीं रख्खी थी उम्मिद के ये परिणाम क्या लाएगा
सबकी तरह मेंने भी कहा, जो होगा देखा जाएगा

फ़िर क्यूँ ..?
फिर क्यूँ... मुझे इन कर्जोंं ‌‌और फर्जों में डुबोया गया, जब से लगा हूँ पैसे कमां
इस बार गल्ती मेरी नहीं है माँ, इस बार गल्ती मेरी नहीं है माँ।

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