एक इतवार ऐैसा भी

कल रविवार है और आज मुझे बुखार है
कैसा ये जूनून है, कैसा ये खुमार है

मम्मी देखना, कल सभी आएँगे मुझे बुलाने
बता देना सब सच सच, तुम करना न कोई बहाने

उन सब में एक मेरा जिग़री होगा
जिसको समझ सिर्फ़ इतनी, "अरे चल न यार, कुछ नहीं होगा"

पर तुम उसको डाँटना मत, वो तुमसे डरता अब भी है
ज़िद्दी है थोड़ा, करता नादानियाँ वो अब भी है

मेरी सुनो तोह बस इतनी सी बात का ख्याल रखना
जिसको मेरा ख्याल आया है अभी, तुम उसका भी ख्याल रखना

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